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पल भर की ख़ुशी

  काफ़ी दिन हुए कुछ लिखा नहीं। आया तो बहुत कुछ , पर लिखा नहीं। इस वक़्त तो ये भी याद नहीं आ रहा कि याद क्या आया था ? ऐसा अक़्सर ही होता है हमारे साथ , क्योंकि दिमाग़ में कुछ ना कुछ जद्दोजहद तो चलती ही रहती है , कुछ ना कुछ तरद्दुद होता ही है और जब कुछ नहीं होता तो ये परेशानी खाए जाती है कि आज मौसम अच्छा है देखना कल नहीं होगा । अरे !!!!! कल की चिंता मत करो आज तो ख़ुश रहो ! जब ऐसा करो ! तो बात आती है “ बस एक पल की ख़ुशी के लिए कल की क्यों नहीं सोचते ?” तो ऐसा है कि हर समाज oxymoron पर चलता है , मानो या मत मानो !! क्योंकि विरोधाभास न होना , हर एक चीज़ के अस्तित्व को ही ख़त्म कर देगा जिससे परेशानी , अड़चन , रुकावट सामने आती हैं और अगर परेशानी ही सामने ना आएगी तो इंसान की विचार शक्ति , तार्किकता ही नष्ट हो जाएगी बाबूजी ! “If there is no conflict, there is no story .” मन चंचल होता है , उसकी अपनी गति होती है । किसी में कम - किसी ...

तुम बदल गयी हो

  You have changed now!!! …. तुम बहुत बदल गयी हो।। … हाँ … और बदलना तो बदस्तूर चलता ही है ।   मेरे ख़याल से ये बातें वो ही करते हैं , जो ख़ुद अपनी कमियों को छुपाना चाहते हैं। जो आप में बेहतराई के बदलाव नहीं चाहते , क्योंकि जो आप में बेहतर बदलाव चाहते या देखते हैं , वो सतही बातें नहीं करते और अक़्सर बदल जाने का सबब भी वो ही होते हैं जो ये सवाल दर - ब - दर आपसे किए जाते हैं । आपका बदल जाना , आप पर उनके अधिकार को जो ख़त्म कर देता है ।    बदलाव अच्छे , बुरे हर तरह के होते हैं। दुनिया बदलती है , कायनात बदलती है , वक़्त बदलता है , हालात बदलते हैं ,   शक़्ल , सूरत , मिजाज़ , रवायतें सब के सब बदलते हैं और जो नहीं बदलता वो है “ न - बदलना ” । जो ये सवाल मुझसे करते हैं वो ख़ुद भी जानते हैं कि वो ख़ुद कितनी तेज़ी से बदलते हैं। चूँकि आप पर वो अपनी सरपरस्ती खो चुके हैं इसलिए बेबुनियादी तोहमतें लगाकर वो अपने मन के एक ऐसे को...